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Showing posts from June, 2013

पीएम अंकल, दे दो ना मेरा पापा

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-आठ साल बाद भी लापता फ्लाईट इंजीनियर का सुराग नहीं - पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन से 16 नवंबर 2004 से है लापता                            प्रधानमंत्री के नाम एक मासूम का पत्र   -आद्या झा (निक्की) पीएम अंकल, मेरा पापा दे दो ना, प्लीज. मुङो पता है, मेरे पापा संजय कुमार झा आप लोगों के पास ही हैं. उन्हें आप लोगों ने कहीं छिपा दिया है. आप लोग झूठ कहते हैं, वह खो गये हैं. वह कोई बच्च हैं या गुड़िया जो खो जायेंगे. आठ साल हो गये. अब और मजाक मत कीजिये. देखो ना, मैं भी अब आठ साल की हो गयी. लेकिन पापा को सिर्फ फोटो में ही देखा है. मम्मी-दादी से जब भी पूछती हूं, पापा कब आयेंगे, तो हमेशा कहती हैं, बाबू, जल्दी आ जायेंगे. और न जाने क्यों रोने लगती हैं. सभी लोग कहते हैं कि पापा जहां पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन में डय़ूटी कर रहे थे, वहां से खो गये. हमें इतना बेवकूफ समझते हैं क्या ? मम्मी पूरी-पूरी रात सोती नहीं. पापा के लिए रोती हैं. नानी कह रही थी, पापा-मम्मी की शादी के कुछ...

मोहल्ले के आतंकियों के लिए है कोई कानून

राहुल मिश्र, कोलकाता मोहल्ले के मास्टर महाशय टय़ूशन पढ़ा कर लौट रहे थे. रात हो गयी थी. रास्ते में अचानक खेत से चीख सुनाई दी. पास गये तो देखा : तीन युवक एक के पेट में चाकू घोंपे जा रहे थे. सामने हत्या होते बुजुर्ग मास्टर भय से पसीना-पसीना हो गये. हत्यारों ने उन्हें देख लिया. वे पास आये और कहा : सर, आपने कुछ नहीं देखा. चुपचाप घर जायिये. अपने ही पढ़ाये छात्रों के हाथों कत्ल देखने के बाद बेचैनी में मास्टर की रात नींद हराम हो गयी. बच्चों के लाख पूछने पर भी कुछ न बताते. बार-बार चौंक उठते. सुबह हुई तो दरवाजे पर हत्यारे खड़े मिले. घर से निकलते, टय़ूशन-बाजार जाते हर वक्त हत्यारों की निगाहें डराती नजर आती. कभी ये खिड़की पर आ धमकते, तो कभी साइकिल से पीछा करके याद दिलाता कि आपने कुछ नहीं देखा. इसी तरह दहशत में दिन बीतते गये. एक बार दायित्व समझते हुए हिम्मत जुटा कर थाने पहुंचे, तो थाने के अफसर ने राजनीतिक हत्या के मामलों में न पड़ने की सलाह देते हुए घर भेज दिया. खबर हत्यारों तक पहुंच गयी. अंजाम के तौर पर बेटे को दरवाजे पर खून में लथपथ पाया और अगले दिन बेटी के चेहरे पर एसिड उड़ेल दिया गया. यह कहानी सि...