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Showing posts from March, 2014

क्या रंजीत बनेगा देश का प्रधानमंत्री

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राहुल मिश्र, चाय की केतली लिये नन्हा रंजीत जब गली से गुजरता है. उसके अंदाज से लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट आ ही जाती है. वह अपने स्टाइल में लोगों से हाल पूछता है : की होइस, की खाइस? जवाब में कोई कहता गली का हीरो गुजर रहा है. कोई उसके बालों में हाथ फिरा देता. कोई बॉस पुकारता तो कोई उसी के अंदाज में उसका हाल पूछ लेता. रंजीत कोलकाता के व्यस्ततम इलाके में एक चाय की दुकान पर काम करता है. उसकी उम्र 10 साल से अधिक नहीं होगी. दुकान पर चाय बांटने के साथ वह दफ्तरों में चाय पहुंचाने जाया करता है. उसकी चंचल और बेफिक्र हरकतें दफ्तर के शांत वातावरण को कुछ पल के लिए उत्साहित कर देती है. अधिकतर लोग उसके पास आने पर काम रोक कर उससे कुछ न कुछ गुफ्तगू कर ही लेते हैं. जब वह चाय देते हुए कंप्यूटर स्क्रीन पर लिखी अंगरेजी की पंक्तियां साफ-साफ और फर्राटे से पढ़ देता है. राजनेताओं व फिल्मी हस्तियों की तसवीर देख कर उनके नाम और परिचय बता देता है, तो कई चकित हो जाते हैं. कई पीठ थपथपाते हैं. कुछ देर के लिए रंजीत से शुरू चर्चा देश की बदहाली तक पहुंच जाती है. गरीबी, शोषण, करप्शन की बातें जोर-जोर से होने लगती है. उस द...

महिला होने का ‘फायदा’ न उठायें

।। राहुल मिश्र।। सिटी बस में एक युवती सवार होती है. दरवाजे की तरफ से महिलाओं के लिए आरक्षित कई खाली सीटों को छोड़ती हुई आखिर की सीट के पास आकर खड़ी होती है, जिस पर उसके पिता की उम्र के एक बुजुर्ग व्यक्ति बैठे हुए हैं. लड़की उन्हें सीट छोड़ने को कहती है. बजुर्ग सज्जन सामने की सीटों की ओर निगाह डालते हुए उठ खड़े होते हैं. सीट छोड़ रहे इस व्यक्ति के चेहरे पर जितनी विनम्रता है, उतनी ही रूखाई युवती के चेहरे पर दिख रही है. यह नजारा पीछे बैठे कई पुरुषों को नागवार गुजर रहा है, फिर भी वे चुप्पी साधे और चिढ़े हुए बैठे हैं. वे एक-दूसरे  को देखते हुए मानो इशारों में पूछ रहे हों- कैसी विडंबना है यह? इतने में एक युवक फुसफुसाना शुरू कर देता है, तो उसका साथी चुप रहने की हिदायत देता है. लेकिन चुप्पी अधिक देर तक साधी नहीं जा सकी. लोगों ने ऐसे कई उदाहरण देने शुरू कर दिये. उनके मुताबिक, इन दिनों महिलाओं द्वारा अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने के कई मामले सामने आ रहे हैं और पुरुषों में इसका भय इस कदर है कि महिलाओं के आस-पास भी फटकने और कुछ बोलने से घबराने लगे हैं. एक युवक ने हाल ही में बस...

क्या आपको पाकिस्तानियों से हमदर्दी है

राहुल मिश्र, कोलकाता पाकिस्तानियों से हमदर्दी से देशद्रोह का ख्याल आता है क्या? क्या 26/11, जवानों के कटे सिर, कारगिल, ढेरों आतंकी हमले, देश का बंटवारा, कश्मीर आदि जेहन में आते हैं. गुस्सा आता है क्या? अगर ऐसा है तो गुस्से पर रहमदीली को हावी हो जाने दें और कुछ देर के लिए हमदर्द बन जाइये. जरा, पाकिस्तान का माहौल और वहां रह रहे करीब 16 करोड़ हम आप की तरह आम लोगों के बारे में सोचते हैं, कि क्या वे हमारी तरह ही तो होंगे ना ? दरअसल, पाकिस्तान से रोज-रोज आ रहीं आतंकी हमलों में मरने की खबरों ने थोड़ा सोचने को मजबूर किया है. सिर्फ इतना ही नहीं खुद के नजरिया और इनसानियत को लेकर भी मन में कई सवाल सामने खड़े हो गये. खबर आयी कि पाकिस्तान की राजधानी इसलामाबाद में हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी की और ग्रेनेड फेंका. इसमें न्यायाधीश समेत 11 लोगों की मौत हो गयी, जबकि 25 लोग घायल हो गये. अंधाधुंध गोलीबारी करीब 15 मिनट तक चली. 26/11 की तरह ही नजारा होगा. इंटरनेट पर खंगालने पर पता चला कि इस वर्ष एक जनवरी से लेकर 23 फरवरी तक इन 54 दिनों में वहां विभिन्न जगहों पर 68 बड़े आत्मघाती हमले हुए. इसमे...