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Showing posts from September, 2014

चांदनी रात का मजा क्यूं न हम भी लें

राहुल मिश्र प्रभात खबर, कोलकाता याद है आपको, आखिरी बार तारों से भरा आसमान कब देखा था? चांदनी रात को कभी महसूस भी किया कि नहीं ? सूर्योदय-सूर्यास्त को कब महसूस किया? आसमान में इंद्रधनुष कब देखा था ?  कब धूप में हुई बारिश में भीगा? कोयल के बोल कब सुने? पेड़ पर घोंसला और उसमें बच्चों को दाना खिलाते पक्षी को कभी देखा? ऐसे सवालों के सामने हम शहर-महानगर में रहनेवाले लोग दुखी हो जाते हैं कि कैसे हम प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं. उसे महसूस नहीं कर पा रहे हैं. पिछले दिनों शिक्षक दिवस पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बच्चों से बात कर रहे थे तो असम के एक बच्चे ने उनसे जलवायु परिवर्तन को रोकने व पर्यावरण को बचाने के उपाय पूछे  थे. जवाब में उन्होंने कहा था : अब मेरे मन में एक सवाल है कि सचमुच में क्या चेंज हुआ है. हम अपने आप से पूछें. आपने देखा होगा कि हमारे गांव में जो उम्रदराज लोग होते हैं ना 70-80-85-90 के लोग सर्दियों में आप देखेंगे तो वह कहते हैं कि पिछली बार से इस बार सर्दी ज्यादा है. एक्च्यूली सर्दी ज्यादा नहीं है उनकी उम्र बढ़ने के कारण उनकी सहने की शक्ति कम हो गयी है. इसीलिए उनको ...

सनातन धर्म को लेकर शंकाओं का निवारण जरूरी

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रमेश द्विवेदी  आजकल देश में शिरडी के साईं बाबा को कथित रूप से भगवान जैसा माननेवाले उनके भक्तों और सनातन धर्म के आचार्यो-संतों के आचरण को लेकर भ्रामक स्थिति बनी है. सियासी हलकों से हाल में आयी कतिपय टिप्पणयिों और उन पर संत-महात्माओं की प्रतिक्रि याओं से स्थिति अिप्रय हुई है. यहां तक कि सांप्रदायिक सौहार्द के लिए देश- विदेश में माने जानेवाले शिरडी धाम के भक्तों को ‘साईंराम’ कहने से रोका जा रहा है. ऐसे में सनातम धर्म की मूल भावना और साईं बाबा की भिक्त से जुड़ी शंकाओं का निवारण जरूरी है.      भगवान आद्य शंकराचार्य ने देश के चार कोनों पर चार आश्रमों या शंकर मठों की स्थापना करते हुए विचार किया था - स्व स्व राष्ट्र प्रतिष्ठित्यै संचार: सुविधियतां अर्थात, संतजन राष्ट्र निर्माण में सदा भ्रमणशील रहें, अपनी नैतिक समीक्षा करें एवं राष्ट्र की भी समीक्षा करते हुए धर्मोपदेश एवं सदाचरण से समाज का नैतिक स्खलन रोकने को सचेष्ट रहें. इसके अलावा 12 वर्षो पर होनेवाले महाकुंभ में एकजुट होकर शास्त्नीय चिंतन-मनन एवं मंथन से देश की समस्याओं का समाधान तलाशें. फिर कुंभ समाप्ति के बाद अपने मठों ...