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Showing posts from October, 2014

बंगाल में पुलिसवालों को सिंघम की जरूरत

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विकास गुप्ता, कोलकाता पुलिसवालों से अगर पूछें कि आपकी फेवरिट फिल्म कौन सी है, तो अधिकतर कहेंगेसिंघम, क्योंकि फिल्म में जब विलेन के सामने बाजीराव सिंघम कहता है अटा माझी सटकली, तो वे भी अपने रौब में आ जाते हैं, सीना चौड़ा हो जाता है. लेकिन पश्चिम बंगाल में वर्दीवालों को यह एहसास सिर्फ सिनेमा देखने के दौरान ही होता है, तभी तो जब जो चाहे पीट कर चला जाता है. थाने में घुस कर धमकी व अपशब्द सुना जाता है. ये सिंघम के दीवाने गोली-बम की मार भी ङोल जाते हैं और  कार्रवाई करने से पहले अपराधी की औकात पूछ लेते हैं कि कहीं उसकी पहुंच किसी नेता, मंत्री या मुख्यमंत्री तक तो नहीं. क्या पता गिरफ्तार कर ले गये तो कहीं सीएम स्वयं थाने ना आ पहुंचे और अपशब्दों से इज्जत उतार जायें. या फिर फोन पर ही कोई माई-बाप ना आ टपके. जी हां, नयी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही यह आलम है. हाल ही में एक पार्षद ने अपने समर्थकों के साथ मिल कर ट्रैफिक सर्जेट के साथ वहां मौजूद पुलिसवालों की पिटाई कर दी, क्योंकि उन्होंने नो पार्किग जोन में खड़ी टैक्सी पर केस दर्ज किया था. जब मार खाकर पुलिसवाले थाने पहुंचे तो उस पार्षद का न...

मुलायम, लालू व करुणानिधि की राह पर ममता

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-वंशवाद की राजनीति का स्याह पक्ष नवीन श्रीवास्तव भारतीय राजनीति में वंशवाद या भाई-भतीजावाद कोई नयी बात नहीं है. अलग-अलग समय में वंशवाद के मसले पर कांग्रेस को पानी पी पीकर कोसने वाले राजनीतिक दल भी इससे अछूते नहीं हैं. उन्हें भी यह रोग लग चुका है. सारधा घोटाले की सीबीआइ जांच, बर्दवान विस्फोट कांड की एनआइए जांच व विपक्षियों के चौतरफा हमलों से हिली पश्चिम बंगाल सरकार की मुखिया ममता बनर्जी ने भी अंतत: अपने परिवार पर ही भरोसा जताया है. अपने राजनीतिक सिपहसालार मुकुल राय व उनके करीबियों के पर कतरने के बाद उन्होंने अपने भतीजे (अभिषेक बनर्जी)का विधिवत अभिषेक किया है. अपनी पार्टी के दो युवा संगठनों तृणमूल युवा व तृणमूल यूथ कांग्रेस का विलय कर अभिषेक को उसका मुखिया बना दिया है. उन्हें भी लगने लगा है कि अभिषेक के जरिये पार्टी का चेहरा बदला जा सकता है. सवाल यह है कि क्या उनकी पार्टी में दूसरे योग्य नेताओं की कमी हो गयी है या वह भी कांग्रेस समेत दूसरे दलों की तरह भाई-भतीजावाद को ही पल्लवित और पुष्पित कर रही हैं. इससे पहले भी दूसरे दल मसलन समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), राष्ट्रवादी ...

सरिता के साथ नाइंसाफी, निंदनीय व शर्मनाक

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नवीन श्रीवास्तव इंचियोन एशियाई खेल में कांस्य पदक स्वीकार करने से इनकार करने वाली देश की महिला मुक्केबाज लैशराम सरिता देवी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी एसोसिएशन (एआइबीए) ने उन्हें अस्थायी तौर पर निलंबित कर दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण कदम उठाया है. न सिर्फ सरिता उनके कोचों व इंचियोन एशियाड में भारत के दल प्रमुख पर भी इसकी गाज गिरी है. इसकी जितनी भी निंदा की जाये कम है. ऐसा कर उसने अदूरदर्शिता का परिचय दिया है. सरिता देवी को ऐसे जुर्म की सजा दी गयी है जो उन्होंने किया ही नहीं. नाइंसाफी तो उनके साथ की गयी. उन्होंने तो रेफरी के एक विवादास्पद फैसले का बस विरोध किया था. जैसा कि हम सभी जानते हैं, सरिता देवी रेफरी के खराब फैसले का शिकार बनीं. हम सबने भी अपने टीवी सेट पर उस बाउट को देखा जिसमें सरिता अपने प्रतिद्वंद्वी पर भारी पड़ रही थीं. पर रेफरी ने दक्षिण कोरिया की मुक्केबाज जिना पार्क को विजेता घोषित कर दिया. इसकी वजह से जिना रजत पदक विजेता बन गयी. रेफरी के इस एक फैसले ने सरिता के साथ-साथ करोड़ों हिंदुस्तानियों का दिल तोड़ दिया. यह हम सबके लिए दुखद था. कोई भी खेल या देश...