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Showing posts from January, 2015

चुप हो गयी एक सत्याग्रही की आवाज

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डॉ कृष्ण बिहारी मिश्र, वरिष्ठ साहित्यकार आठ दशक की लोकयात्रा पूरी कर ली थी अशोकजी ने. यानी बुढ़ौती तो आ ही गयी थी, मगर अशोकजी की जीवनप्रियता और रचनात्मक सक्रियता पूरी तरह जवान थी. इसलिए उनका यकायक आंख मूंद कर सदा के लिए चुप हो जाना कदाचार के सघन तमस् से निरंतर आहत दुनिया के निरूपाय लोगों के लिए असाधारण त्रसदी है, जैसे एक बड़ा सहारा अदृश्य हो गया, जैसे सुरक्षा की आश्वस्ति का आत्मीय संबल टूट गया. नियति की त्रसद लीला अशोकजी के निजी स्तर पर लगभग दो दशकों से नाना रूपों में क्रियाशील थी. अनेक आत्मीय चरित्रों के वियोग-दंश को निरूपाय मुद्रा में अशोकजी ङोल रहे थे. मां के जाने के बाद सारा ममत्व बहनों से जुड़ गया था, जो एक-एक कर संसार से चली गयीं. पिताजी के परलोक गमन के बाद शायद बुढ़ौती का अहसास होने लगा था. और छोटे भाई दिलीप सेकसरिया की मृत्यु ने अशोकजी को निपट अकेला बना दिया. पिछले कुछ दिनों से अशोकजी अधिक उदास रहने लगे थे. मगर युवा मित्र वार्ता-संपादक सुनील, जिनकी मृत्यु ने उन्हें भीतर से तोड़ दिया था. और फिर ज्योत्सना मिलन का यकायक संसार छोड़ना, ज्येष्ठ बंधु कृती-संपादक नारायण दत्तजी की आकस्म...

अब भारत के जेल में कैदी कर सकेंगे सेक्स

जेल में बंद कैदियों को भी अब अपने पति या पत्नी से यौन संबंध बनाने का अधिकार मिलेगा। ये ऐतिहासिक फैसला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट ने एक कमेटी बनाने का आदेश दिया है जो तय करेगा कि किस तरह के कैदियों को और किस परिस्थिति में ये अधिकार दिया जाए। एक कैदी पति-पत्नी के मामले में फैसला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि जेल में बंद कैदी को अपने पति या पत्नी से यौन संबंध बनाने और बच्चे पैदा करने का अधिकार है। संविधान के मुताबिक ये एक मौलिक अधिकार है और कैदियों को इससे वंचित नहीं रखा जा सकता। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया जाए। कमेटी जेलों की हालत को समझकर एक दिशा-निर्देश बनाएगी। कमेटी ये तय करेगी कि किस तरह के कैदियों को और किस परिस्थिति में ये अधिकार दिया जाएगा। जेल के अंदर सुविधा बनाई जाएगी जहां कैदी की पत्नी या उसका पति उससे मिल सके। कोर्ट ने ये साफ किया है कि किस कैदी को ये अधिकार दिया जाएगा, ये सरकार तय करेगी। इसमें सामाजिक सरोकार और कानून व्यवस्था का ख्याल रखा जाएगा। कोर्ट के मुताबिक हर व्यक्ति को अपने खा...

एक इतालवी, जिस पर नाज़ करता है राजस्थान

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बीकानेर में एल पी तेसीतोरी की समाधि - थार के इतालवी साधक थे एलपी तेस्सीतोरी -बीकानेर रियासत पर बिखरे हुए दुर्लभ शोध संग्रह को सहेजने की जरूरत रमेश द्विवेदी ज़रा सोचिए कि आज से 127 साल पहले सुदूर देश इटली में एक व्यक्ति को संस्कृत व हिंदी सीखते-पढ़ते हुए राजस्थान से इस क़दर लगाव हो जाता है कि नियति उसे उसकी मनपसंद जगह राजस्थान खींच लाती है और वहां रहते हुए महज साढ़े पांच साल के कार्यकाल में वह शख्स राजस्थानी भाषा-साहित्य-संस्कृति-इतिहास को इतना कुछ दे जाता है, जो एक परिपक्व व्यक्ति के लिए भी पूरे जीवन-काल में असंभव है. बात हो रही है महज 23 वर्ष की उम्र में इटली से राजस्थान आये लुइज पियो तेस्सीतोरी की, जिसे अगर पूरा भारत नहीं, तो कम से कम समूचा राजस्थान, ‘थार के इतालवी साधक’ के रूप में जानता-पहचानता है. यह बात पिछले दिनों दि एशियाटिक सोसाइटी, कोलकाता और राजस्थानी प्रचारिणी सभा की ओर से संयुक्त रूप से यहां आयोजित एल-पी तेस्सीतोरी व्याख्यानमाला के दौरान उभर कर सामने आयी. इस दौरान बीज भाषण देते हुए जनसत्ता, दिल्ली के संपादक ओम थानवी ने इतालवी विद्वान पर अपने अनौपचारिक अध्ययन के हवाले से जोर द...