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Two frogs in the milk

This is the story of two frogs. One frog was fat and the other skinny. One day, while searching for food, they inadvertently jumped into a vat of milk. They couldn't get out, as the sides were too slippery, so they were just swimming around. The fat frog said to the skinny frog, "Brother frog, there's no use paddling any longer. We're just going to drown, so we might as well give up." The skinny frog replied, "Hold on brother, keep paddling. Somebody will get us out." And they continued paddling for hours. After a while, the fat frog said, "Brother frog, there's no use. I'm becoming very tired now. I'm just going to stop paddling and drown. It's Sunday and nobody's working. We're doomed. There's no possible way out of here." But the skinny frog said, "Keep trying. Keep paddling. Something will happen, keep paddling." Another couple of hours passed. The fat frog said, "I can't go on any...

The fence

There once was a little boy who had a bad temper. His father gave him a bag of nails and told him that every time he lost his temper, he must hammer a nail into the fence. The first day the boy had driven 37 nails into the fence. Over the next few weeks as he learned to control his anger, the number of nails hammered daily, gradually dwindled down. He discovered it was easier to hold his temper than to drive those nails into the fence. Finally the day came when the boy didn’t lose his temper at all. He told his father about it and the father suggested that the boy now pull out one nail for each day that he was able to hold his temper. The days passed and the young boy was finally able to tell his father that all the nails were gone. The father took his son by the hand and led him to the fence. He said “you have done well, my son, but look at the holes in the fence. The fence will never be the same. When you say things in anger, they leave a scar just like this one.” You ...

The tiger's whisker

Once upon a time, a young wife named Yun Ok was at her wit's end. Her husband had always been a tender and loving soulmate before he had left for the wars but, ever since he returned home, he was cross, angry, and unpredictable. She was almost afraid to live with her own husband. Only in glancing moments did she catch a shadow of the husband she used to know and love. When one ailment or another bothered people in her village, they would often rush for a cure to a hermit who lived deep in the mountains. Not Yun Ok. She always prided herself that she could heal her own troubles. But this time was different. She was desperate. As Yun Ok approached the hermit's hut, she saw the door was open. The old man said without turning around: "I hear you. What's your problem?" She explained the situation. His back still to her, he said, "Ah yes, it's often that way when soldiers return from t...

दर्द होता है तो दूसरों का दर्द समझते क्यों नहीं

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घाव के बाद मरहम लगाया जाता है. उस पर नमक नहीं छिड़का जाता. पर हमारे समाज का उसूल है कि वह ‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’ की कहावत ही चरितार्थ करेगा. समाज के इस खास उसूल का भी खासकर महिलाओं के लिए बड़ी ही कट्टरता से पालन किया जाता है. कुछ भी हुआ तो दोष किसका? महिला का! विपदा में बेचारी भली नारी भी क्यों न मरी, दोष किसका? ‘व्यभिचारी’ नारी का! मतलब औरत होना मानो शापित बन गया हो जैसे. क्यों? क्योंकि महिला पुरुषों के मुकाबले कमजोर मानी जाती है. कमजोर तन से और धन से. अब इसे विडंबना मानें या दूषित, बीमार सोच? आखिर हर तरह से जलती तो बस नारी है. नारी को बेचारी भी बना दिया और उस बेचारी नारी के साथ कुछ हुआ नहीं कि वह चरित्रहीन, कुलक्षिणी सब बन जाती है. समाज के इस दोहरे मापदंडों के कारण जाने कितनी जिंदगियां जुल्म सहकर भी चुप रहती हैं या आखिरकार उसके अपराध करने वाला तो पहले की ही तरह शान से जीता है, पर उस अपराध की शिकार हुई औरत समाज के इस दोहरे चरित्र के तले या तो मर जाती है या बार-बार मर-मर कर जीने को मजबूर होती है. कोलकाता की सुजैट जोर्डन आज सरवाइवर्स फॉर विक्टिम्स ऑफ सोशल जस्टिस नाम की हेल...

हम नमस्ते क्यों करते है ?

शास्त्रों में पाँच प्रकार के अभिवादन बतलाये गए है जिन में से एक है "नमस्कारम"। नमस्कार को कई प्रकार से देखा और समझा जा सकता है। संस्कृत में इसे विच्छेद करे तो हम पाएंगे की नमस्ते दो शब्दों से बना है नमः + ते। नमः का मतलब होता है मैं (मेरा अंहकार) झुक गया। नम का एक और अर्थ हो सकता है जो है न + में यानी की मेरा नही। आध्यात्म की दृष्टी से इसमें मनुष्य दुसरे मनुष्य के सामने अपने अंहकार को कम कर रहा है। नमस्ते करते समय में दोनों हाथो को जोड़ कर एक कर दिया जाता है जिसका अर्थ है की इस अभिवादन के बाद दोनों व्यक्ति के दिमाग मिल गए या एक दिशा में हो गये। हम बड़ों के पैर क्यों छूते है ? भारत में बड़े बुजुर्गो के पाँव छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। ये दरअसल बुजुर्ग, सम्मानित व्यक्ति के द्वारा किए हुए उपकार के प्रतिस्वरुप अपने समर्पण की अभिव्यक्ति होती है। अच्छे भावः से किया हुआ सम्मान के बदले बड़े लोग आशीर्वाद देते है जो एक सकारात्मक ऊर्जा होती है। आदर के निम्न प्रकार है : * प्रत्युथान : किसी के स्वागत में उठ कर खड़े होना * नमस्कार : हाथ जोड़ कर सत्कार करना * उपस...

रोचक जानकारी..

*************** ** ☞ एक आदमी साल भर में औसतन 1460 सपने देखता है ☞ कॉकरोच सिर कटने के बाद भी कई सप्ताह तक जिंदा रह सकता है। दरअसल वह सिर कटने से नहीं, भूख से मरता है। ☞ गधे की आंखों की स्थिति कुछ ऐसी होती है कि वह अपने चारों पैरों को एक साथ देख सकता है ☞ ऊंट की आंख में तीन पलकें होतीं हैं जो उन्हें रेगिस्तान में उड़ने वाली रेत से बचाती हैं ☞ सूर्य, धरती से 330,330 गुना बड़ा है ☞ किसी भी वर्गाकार सूखे कागज को आधा- आधा करके 7 बार से अधिक बार नहीं मोड़ा जा सकता ☞ आकाशीय बिजली कड़कने से जो तापमान पैदा होता है वह सूर्य की सतह पर पाए जाने वाले तापमान से पांच गुना ज्यादा होता है ☞ जब कांच टूटता है तो इसके टुकड़े 3000 मील प्रति घंटा की गति से छिटकते हैं। ☞ मनुष्य के शरीर में हर सेकेण्ड 15 मिलियन लाल रक्त कणिकाएं पैदा होतीं हैं और मरती हैं। ☞ जिराफ की जीभ इतनी लंबी होती है कि वह अपने कान साफ़ कर सकता है । अरे हम आपके लिये रोज अच्छी- अच्छी जानकारी लाते है.. कम से कम तुम भी LIKE वाला बटन तो दबा दिया करो दोस्तो..

अपने जख्म से करती हैं दूसरों का इलाज

एचआइवी पीड़ित तीन महिलाएं दूसरों के लिए बनीं मिसाल अचानक मेरे आस पड़ोस में रहनेवाले लोगों ने मुझसे बात करनी बंद कर दी. जिस सहेली का मेरे घर में रोज आना-जाना था, वह मुङो नजरअंदाज करने लगी. नहीं समझ पा रही थी कि मेरी क्या गलती है? .. मुङो एड्स हुआ है, पर इसमें मेरी गलती नहीं है. लोग ऐसा व्यवहार करने लगे जैसे मुङो छुआछूत की बीमारी हो. क्या हमारे प्रति समाज का नजरिया बदल पायेगा? इतना कहते हुए कुछ पल के लिए सोनाली खामोश हो गयी. फिर अचानक वह खड़ी हो गयी और कहा एड्स पीड़ितों को अपनों की सहानुभूति की जरूरत है. समाज को जागरूक करना है जब तक सांस चल रही है. शिव कुमार राउत, कोलकाता सोनाली जैसी न जाने कितनी ही महिलाएं हैं, जो एड्स की शिकार हैं. एड्स को लेकर सरकार चाहे जितने भी जागरूकता अभियान चलाये, लेकिन आज भी एचआइवी पॉजिटिव लोगों को देखने का नजरिया नहीं बदला. आज भी देश में एचआइवी को छुआछूत का रोग समझा जाता है. एड्स पीड़ितों के साथ अमानवीय बर्ताव के किस्से आम गये हैं. पीड़ितों की मदद करने के बजाय उन्हें परिवार-समाज से निकाल दिया जाता है. यहां तक कि उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में एड्स से मां-पि...