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सरोवर में भी कमल ही खिले हैं

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राहुल मिश्र, कोलकाता मौसम के साथ मिजाज का बदलना स्वाभाविक है. चुनावी मौसम में चुनाव की बात न हो, त्योहार के मौसम में त्योहार की और खेल के मौसम में खेल की न हो तो ऐसा अप्राकृतिक ही कहलायेगा. ये तो मौसम का ही जादू है कि इन दिनों रवींद्र सरोवर में भी कमल के फूल ही पूरे रौब से खिले हुए हैं. देश का राजनीतिक मौसम भी कमल फूल के खिलने का ही है. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव में कल्पना के परे प्रदर्शन किया. वर्षो बाद किसी एक पार्टी को बहुमत मिला. ऐसे में जहां चार लोग जुटे, वहां यह चर्चा का विषय न रहे तो यह भी बड़ी चर्चा का विषय बन सकता है. दरअसल, सरोवर में कमल फूल के खिलने को राजनीतिक माहौल से जोड़ने का तुक बने न बने, लेकिन रवींद्र सरोवर के पास के पार्को में प्राकृतिक सुख लेने आनेवालों को देश के वर्तमान माहौल पर चर्चा करते पाया जाना आम बात है. यहां चर्चा करनेवालों में कई मोदी तो कुछ दीदी के समर्थक भी होते हैं. नयी सरकार बन रही है, तो सरकार या प्रधानमंत्री क्या करेंगे. किस मुद्दे को कैसे निबटायेंगे. यह मुख्य विषय रहता ही है. पिछले दिनों मार्निग वाकर्स का एक समूह ...

एक आइकोनिक फोटो के पीछे की मार्मिक कहानी ~~~!!

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आसिफ़ अली हाशमी   इथोपिया में एक कुपोषित बच्ची के मरने के इंतज़ार में उसके पास बैठा एक गिद्ध.....!! इस फोटो को सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर न जाने कितनी बार लाखों ..करोड़ों लोगों द्वारा  शेयर किया गया है, करोड़ों लोगों ने इसको टेग किया है...मगर क्या इसके पीछे की मार्मिक कहानी किसी को पता है....? इस फोटो को खींचने वाले फोटोग्राफर ने तीन माह बाद पश्चाताप  में आत्म हत्या कर ली थी...! यह फोटो मार्च 1993 में मशहूर फोटोग्राफर केविन कार्टर ने भुखमरी और कुपोषण से झूझते देश इथोपिया के एक गांव आयोद में खींचा था... यह एक इथोपियाई कुपोषित बच्ची का फोटो है...जो कि अपने माता पिता की झोंपड़ी की और रेंग कर जाने का प्रयत्न कर रही है....माता पिता..खाना ढूँढने जंगल गए हुए हैं....भूख ने उस बच्ची को बेदम कर रखा है...उसकी ताक में एक गिद्ध बैठा है...जो कि उसके मरने का इंतज़ार कर रहा है...केविन कार्टर ने काफी देर इस दृश्य को देखा ...और अपने कैमरे में क़ैद कर लिया.. ..और उस गिद्ध को वहां से उड़ा दिया ! वैसे इस फोटो के अलावा इथोपिया के इस संकट के उन्होंने और भी कई फोटो खींचे थे...मगर यह फोटो उनको विशेष लग...

मरने से पहले बच्‍चे ने कहा भगवान को सब कुछ बताऊंगा

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दमिश्‍क। 'मैं मरने के बाद भगवान को सब कुछ बताऊंगा,' यह शब्‍द उस साल के बच्‍चे के हैं जिसकी सीरिया में हुए ब्‍लास्‍ट में मौत हो चुकी है। ब्‍लास्‍ट में बुरी तरह से घायल इस बच्‍चे को जब एक अस्‍पताल में इलाज के लिए लाया गया तो यह उसके आखिरी शब्‍द थे। इन शब्‍दों के बाद ही इस बच्‍चे ने दम तोड़ दिया। इस बच्‍चे की फोटोग्राफ और उसके  शब्‍द सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। सवाल उठाए जा रहे हैं कि खुद को इंसान समझने वाले लोगों में क्‍या इंसानियत खत्‍म हो चुकी है। सीरिया में मार्च 2011 से सिविल वॉर जारी है। इस सिविल वॉर में अब तक आधिकारिक‍ तौर पर 150,000 लोगों की मौत हो चुकी है और इसमें से 11,420 बच्‍चे हैं। इस बच्‍चे की फोटो से ही सीरिया में जारी हालातों की एक झलक मिल जाती है। आगे की कुछ स्‍लाइड्स में देखिए इसी बच्‍चे की कुछ तस्‍वीरें जो यकीनन आपकी आंखों में आंसू ला देंगी। रोज बढ़ रहा है आंकड़ा सीरिया में एक अप्रैल तक 150,000 लोगों की मौत रजिस्‍टर हो चुकी हैं। इन 150,000 लोगों की मौतों में फरवरी से लेकर एक अप्रैल के बीच 10,000 लोगों की मौत दर्ज हुई। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक सीरिया में...

मां की लाश से मांग रहा था रुपये

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-गुटखा के लिए मां को मार डाला -मर चुकी मां को बेहोश समझ कर रुपये देने का कर रहा था जिद -तालाब में डूबो कर मां को मारने की कर चुका था कोशिश विकास गुप्ता, कोलकाता ----------------------------- ऐ मां, ला ना रुपये. सिर्फ दस रुपये तो मांग रहा हूं. दे ना, दे दे ना. उठ नाटक मत कर, जल्दी से दे रुपये : जमीन पर अचेत पड़ी वृद्ध मां को वह कुछ इसी तरह हिला-हिला कर रुपये मांग रहा था. उसे यकीन नहीं हो रहा था कि मां मर चुकी है. उसने कुछ ही देर पहले मां को जोर से दीवार में दे मारा था, क्योंकि वह नशे के लिए रुपये देने से मना कर रही थी. दीवार में टकराने के बाद एक चीख के साथ मां जमीन पर गिर पड़ी थी. उसके सिर से खून बह रहे थे. पर बेटे को दम तोड़ रही मां के दर्द का थोड़ा भी आभास न था. उसे लग रहा था कि मां बेहोश होने का नाटक कर रही है. मां की लाश को धक्के देकर उठ जाने व रुपये देने के लिए कहता रहा. जब काफी देर तक मां नहीं हिली, तो वह चीखने लगा, जोर-जोर से रोने लगा. शोर सुन कर बाहर के लोग जुट गये. लोगों ने देखा : मां की लाश के पास 33 वर्षीय शिव शंकर दे पागलों की तरह हरकतें कर रहा था. कुछ भी करने से बेहतर लोगों...

एक मिस्ड कॉल, फिर प्यार, शादी और सौदा

-मिस कॉल्स से करता था दोस्ती, करता था प्यार का नाटक, फिर शादी -बिकने के पहले ही एक होटल के पास से रिहा करायी गयी किशोरी -बहला-फुसला कर उसे भगाने वाला आरोपी युवक भी हुआ गिरफ्तार   विकास गुप्ता, कोलकाता --------------------------- मिस कॉल से किशोरी को फंसा कर उसे बहला फुसला कर नारी तस्करों के पास बेचने की कोशिश के पहले ही पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया. घटना गरफा इलाके के मंडल पाड़ा में रविवार देर रात घटी. गिरफ्तार युवक का नाम सुमन दे (25) है. वह अजय नगर का रहने वाला है. गरफा व आसपास के इलाके में रविवार देर रात छापेमारी के दौरान पीड़िता को रिहा कराया गया. पुलिस ने वहां से आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया है. युवती को मिस कॉल देकर उससे दोस्ती करने के दौरान प्यार के जाल में फंसा कर शादी के नाम पर भगा कर ले जाकर नारी तस्करों के पास किशोरी को बेचने की साजिश रचने का आरोप उस पर लगा है. पुलिस के मुताबिक मंडल पाड़ा की रहने वाली 16 वर्षीय एक किशोरी गत दो दिनों से घर से लापता थी. आसपास के इलाके में उसकी तलाश करने के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिला. अंत में किशोरी की मां शुक्ला मंडल ने बेट...

अरे, ये क्या ! जो सोचता, वही हो जाता

एक बार एक आदमी घूमते-घामते स्वर्ग पहुँच गया. स्वर्ग में सुंदर नजारे देखते हुए वह बहुत देर तक घूमता रहा और अंत में थक हार कर एक वृक्ष के नीचे सो गया. स्वर्ग में जिस वृक्ष के नीचे सोया था, वह कल्पतरू था. कल्पतरू की छांह के नीचे बैठ कर जो भी व्यक्ति जैसी कल्पना करता है, वह साकार हो जाता है. कुछ देर बाद जब उस आदमी की आँख खुली तो उसकी थकान तो जाती रही थी, मगर उसे भूख लग आई थी. उसने सोचा कि काश यहाँ छप्पन भोग से भरी थाली खाने को मिल जाती तो आनंद आ जाता. चूंकि वह कल्पतरू के नीचे था, तो उसकी छप्पन भोग से भरी थाली उसके कल्पना करते ही प्रकट हो गई. चूंकि उसे भूख लगी थी तो उसने झटपट उस भोजन को खा लिया. भोजन के बाद उसे प्यास लगी. उसने सोचा कि काश कितना ही अच्छा होता कि इतने शानदार भोजन के बाद एक बोतल बीयर पीने को मिल जाती. उसका यह सोचना था कि बीयर की बोतल नामालूम कहाँ से प्रकट हो गई. उसने बीयर की बोतल खोली और गटागट पीने लगा. भूख और प्यास थोड़ी शांत हुई तो उसका दिमाग दौड़ा. यह क्या हो रहा है उसने सोचा. क्या मैं सपना देख रहा हूँ? खाना और बीयर हवा में से कैसे प्रकट हो गए? लगता है कि इस पेड़...

क्या मेरा वेतन बढ़ेगा?

प्रेरक सम्मेलन (मोटिवेशन सेमिनार) से लौटकर उत्साहित प्रबंधक ने अपने एक कामगार को अपने ऑफ़िस में बुलाया और कहा – “आज के बाद से अपने काम को तुम स्वयं प्लान करोगे और नियंत्रित करोगे. इससे तुम्हारी उत्पादकता बढ़ेगी.” “इससे क्या मेरे वेतन में बढ़ोत्तरी होगी?” कामगार ने पूछा. “नहीं नहीं, -” प्रबंधक आगे बोला – “पैसा कहीं भी प्रेरणा देने का कारक नहीं बनता और वेतन में बढ़ोत्तरी से तुम्हें कोई संतुष्टि नहीं मिलेगी.” “ठीक है, तो जब मेरी उत्पादकता बढ़ जाएगी तब मेरा वेतन बढ़ेगा?” “देखो, -” प्रबंधक ने समझाया “जाहिर है कि तुम मोटिवेशन थ्योरी को नहीं समझते. इस किताब को ले जाओ और इसे अच्छी तरह से पढ़ो. इसमें सब कुछ विस्तार में समझाया गया है कि किस चीज से तुममें प्रेरक तत्व जागेंगे.” वह आदमी बुझे मन से किताब ले कर जाने लगा. जाते जाते उसने पूछा - “यदि मैं इस किताब को अच्छी तरह से पूरा पढ़ लूं तब तो मेरा वेतन बढ़ेगा?”