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झाड़ुओं की महासभा में बवाल

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राहुल मिश्र, कोलकाता  ------------------- देश में अचानक से बढ़ी पूछ और मिली इज्जत के कारण कुछ झाड़ुओं का दिमाग सातवें आसमान पर हैं. उनमें श्रेय लेने की होड़ सी मची है. एक तरफ मोदी झाड़ू कहता फिर रहा है कि सारा मान मेरी वजह से मिला है, क्योंकि गांधी जयंती पर मुङो ही प्रधानमंत्री ने अपने हाथों में लेकर स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी. वहीं केजरी झाड़ू कह रहा है कि आम आदमी पार्टी का चुनाव चिह्न बन कर इसकी शुरुआत मैंने की, जब दिल्ली से लेकर पूरे देश में पार्टी के समर्थक झाड़ू लेकर निकलते थे. वहीं नगर निगम व नगर पालिका झाड़ुओं ने दोनों झाड़ुओं की दावेदारी पर कड़ी आपत्ति जतायी है, उनका कहना है ये लोग सिर्फ सुर्खियां बटोरने में लगे हैं, असली काम तो वर्षो से हम लोग करते आ रहे हैं. झाड़ुओं के बीच इस तरह की बयानबाजी और विवाद को बड़े-बुजुर्ग-बुद्धिजीवी झाड़ुओं ने गंभीरता लिया और रामलीला मैदान में महासभा बुलायी. सहासभा में देश भर से रेल व ट्रकों में लद-लद कर भारी संख्या में झाड़ू पहुंचे. कोई आम आदमी पार्टी की टोपी लगाये था, तो कोई भगवा पट्टी धारे. कई ग्लैमरस भी थे तो कइयों की रईसी...

मन मार कर क्या जीना

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ये खुशमिजाजी, खुलापन, जिंदा रखता है बालपन । ये खिलखिलाना, चहक जाना, नहीं चाहता इन्हें मारना । ये अहम, इज्जत, अहमियत, बिना मोहब्बत बेकीमत । लोगों का क्या, कुछ तो कहेंगे ही, उनकी बातों से क्या दिल दुखाना । गंभीरता के घेरे में गम घेरता है, मुखौटे चढ़ा कर क्या रहना । दिल की बात जुबान पर आये, दबा कर क्यों बोझ बढ़ाना । मन है इश्वर, मन ही अल्लाह, मन मार कर क्या जीना । -राहुल मिश्रा 

नींद से जागे श्रीहरि और दो मांओं की कोख से जन्मा जरासंध

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बिहार के राजगीर में अाज भी मौजूद है ऐतिहासिक जरासंध अखाड़ा, जहां कभी मल्लयुद्ध के दौरान पांडव भीमसेन ने श्रीकृष्ण के इशारे पर मगध सम्राट जरासंध का वध किया था. द्वापर युग में महाभारत से पहले पांडव भीमसेन मल्लयुद्ध के दौरान मगध सम्राट जरासंध को पटखनी देते हुए ।  देवोत्थान एकादशी को ही दो रानियों से आधा-आधा पैदा हुआ था जरासंध आज भी मगध समाज जरासंधेश्वर जयंती को बतौर जेठान पर्व मनाता है. क्या आप जानते हैं, हमारे पौराणकि ग्रंथ व ऐतिहासिक दस्तावेज ऐसे पात्नों, योद्धाओं व विभूतियों से भरे पड़े हैं, जिन्हें जनमानस उनकी नकारात्मक भूमिका के लिए ही जानता-समझता आया है. पर ऐसे विभूतियों के व्यक्तित्व का एक और पक्ष भी है, जिसे देश-समाज के ज्यादातर लोग नहीं जानते. ऐसी विभूतियों या योद्धाओं को आज भी कतिपत जातियां-जनजातियां ना सिर्फ आदर्श मानती हैं, बल्कि उन्हें विधिवत पूजती हैं. उसे परवाह नहीं है कि धर्म-पुराण या आज के धर्म-गुरु   ऐसी विभूतियों को कैसे व किस रूप में परिभाषित करते हैं. हाल में पता चला कि आज भी मिहषासुर को पूजनेवाले हैं, जो ऐसे ही कितने दैत्यों या नकारात्मक किरदारों को सदियों से...

बंगाल में पुलिसवालों को सिंघम की जरूरत

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विकास गुप्ता, कोलकाता पुलिसवालों से अगर पूछें कि आपकी फेवरिट फिल्म कौन सी है, तो अधिकतर कहेंगेसिंघम, क्योंकि फिल्म में जब विलेन के सामने बाजीराव सिंघम कहता है अटा माझी सटकली, तो वे भी अपने रौब में आ जाते हैं, सीना चौड़ा हो जाता है. लेकिन पश्चिम बंगाल में वर्दीवालों को यह एहसास सिर्फ सिनेमा देखने के दौरान ही होता है, तभी तो जब जो चाहे पीट कर चला जाता है. थाने में घुस कर धमकी व अपशब्द सुना जाता है. ये सिंघम के दीवाने गोली-बम की मार भी ङोल जाते हैं और  कार्रवाई करने से पहले अपराधी की औकात पूछ लेते हैं कि कहीं उसकी पहुंच किसी नेता, मंत्री या मुख्यमंत्री तक तो नहीं. क्या पता गिरफ्तार कर ले गये तो कहीं सीएम स्वयं थाने ना आ पहुंचे और अपशब्दों से इज्जत उतार जायें. या फिर फोन पर ही कोई माई-बाप ना आ टपके. जी हां, नयी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही यह आलम है. हाल ही में एक पार्षद ने अपने समर्थकों के साथ मिल कर ट्रैफिक सर्जेट के साथ वहां मौजूद पुलिसवालों की पिटाई कर दी, क्योंकि उन्होंने नो पार्किग जोन में खड़ी टैक्सी पर केस दर्ज किया था. जब मार खाकर पुलिसवाले थाने पहुंचे तो उस पार्षद का न...

मुलायम, लालू व करुणानिधि की राह पर ममता

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-वंशवाद की राजनीति का स्याह पक्ष नवीन श्रीवास्तव भारतीय राजनीति में वंशवाद या भाई-भतीजावाद कोई नयी बात नहीं है. अलग-अलग समय में वंशवाद के मसले पर कांग्रेस को पानी पी पीकर कोसने वाले राजनीतिक दल भी इससे अछूते नहीं हैं. उन्हें भी यह रोग लग चुका है. सारधा घोटाले की सीबीआइ जांच, बर्दवान विस्फोट कांड की एनआइए जांच व विपक्षियों के चौतरफा हमलों से हिली पश्चिम बंगाल सरकार की मुखिया ममता बनर्जी ने भी अंतत: अपने परिवार पर ही भरोसा जताया है. अपने राजनीतिक सिपहसालार मुकुल राय व उनके करीबियों के पर कतरने के बाद उन्होंने अपने भतीजे (अभिषेक बनर्जी)का विधिवत अभिषेक किया है. अपनी पार्टी के दो युवा संगठनों तृणमूल युवा व तृणमूल यूथ कांग्रेस का विलय कर अभिषेक को उसका मुखिया बना दिया है. उन्हें भी लगने लगा है कि अभिषेक के जरिये पार्टी का चेहरा बदला जा सकता है. सवाल यह है कि क्या उनकी पार्टी में दूसरे योग्य नेताओं की कमी हो गयी है या वह भी कांग्रेस समेत दूसरे दलों की तरह भाई-भतीजावाद को ही पल्लवित और पुष्पित कर रही हैं. इससे पहले भी दूसरे दल मसलन समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), राष्ट्रवादी ...

सरिता के साथ नाइंसाफी, निंदनीय व शर्मनाक

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नवीन श्रीवास्तव इंचियोन एशियाई खेल में कांस्य पदक स्वीकार करने से इनकार करने वाली देश की महिला मुक्केबाज लैशराम सरिता देवी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी एसोसिएशन (एआइबीए) ने उन्हें अस्थायी तौर पर निलंबित कर दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण कदम उठाया है. न सिर्फ सरिता उनके कोचों व इंचियोन एशियाड में भारत के दल प्रमुख पर भी इसकी गाज गिरी है. इसकी जितनी भी निंदा की जाये कम है. ऐसा कर उसने अदूरदर्शिता का परिचय दिया है. सरिता देवी को ऐसे जुर्म की सजा दी गयी है जो उन्होंने किया ही नहीं. नाइंसाफी तो उनके साथ की गयी. उन्होंने तो रेफरी के एक विवादास्पद फैसले का बस विरोध किया था. जैसा कि हम सभी जानते हैं, सरिता देवी रेफरी के खराब फैसले का शिकार बनीं. हम सबने भी अपने टीवी सेट पर उस बाउट को देखा जिसमें सरिता अपने प्रतिद्वंद्वी पर भारी पड़ रही थीं. पर रेफरी ने दक्षिण कोरिया की मुक्केबाज जिना पार्क को विजेता घोषित कर दिया. इसकी वजह से जिना रजत पदक विजेता बन गयी. रेफरी के इस एक फैसले ने सरिता के साथ-साथ करोड़ों हिंदुस्तानियों का दिल तोड़ दिया. यह हम सबके लिए दुखद था. कोई भी खेल या देश...

चांदनी रात का मजा क्यूं न हम भी लें

राहुल मिश्र प्रभात खबर, कोलकाता याद है आपको, आखिरी बार तारों से भरा आसमान कब देखा था? चांदनी रात को कभी महसूस भी किया कि नहीं ? सूर्योदय-सूर्यास्त को कब महसूस किया? आसमान में इंद्रधनुष कब देखा था ?  कब धूप में हुई बारिश में भीगा? कोयल के बोल कब सुने? पेड़ पर घोंसला और उसमें बच्चों को दाना खिलाते पक्षी को कभी देखा? ऐसे सवालों के सामने हम शहर-महानगर में रहनेवाले लोग दुखी हो जाते हैं कि कैसे हम प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं. उसे महसूस नहीं कर पा रहे हैं. पिछले दिनों शिक्षक दिवस पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बच्चों से बात कर रहे थे तो असम के एक बच्चे ने उनसे जलवायु परिवर्तन को रोकने व पर्यावरण को बचाने के उपाय पूछे  थे. जवाब में उन्होंने कहा था : अब मेरे मन में एक सवाल है कि सचमुच में क्या चेंज हुआ है. हम अपने आप से पूछें. आपने देखा होगा कि हमारे गांव में जो उम्रदराज लोग होते हैं ना 70-80-85-90 के लोग सर्दियों में आप देखेंगे तो वह कहते हैं कि पिछली बार से इस बार सर्दी ज्यादा है. एक्च्यूली सर्दी ज्यादा नहीं है उनकी उम्र बढ़ने के कारण उनकी सहने की शक्ति कम हो गयी है. इसीलिए उनको ...