बस यूं ही
इस बार तो गुस्सा इतना था कि बात न करने की कसम खा ली। पर जब वो मुस्कुराता हुआ आया तो, सारी कसमें टूट गयीं दे करके गाली। ----- मेरी ख़ामोशी को बेरुखी न समझ, चुप्पी में भी तुम्हारा ही जिक्र मिलेगा। --- दिल न तोड़ने के चक्कर में बार-बार टूटता चला गया । उनकी ख़ुशी की खातिर, खुद से रूठता चला गया। ----- ऐसे ऐसे फरेबियों से पड़ा है पाला कि इनदिनों खुद पर भी यकीं होता नहीं