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स्मार्टफोन है तो गर्लफ्रेंड भी मिल जायेगी

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अब गर्ल फ्रेंड बनाने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी. अगर आपके पास स्मार्टफोन है तो एप्स डाउनलोड कर लीजिए और फिर ढूंढ लीजिए अपनी मनपसंद गर्ल फ्रेंड. जी हां, वक्त तेजी से बदल रहा है. प्यार का तरीका भी बदल गया है. पहले जिस प्यार को पाने के लिए लंबी मश्क्कत करनी पड़ती थी, अब वही प्यार स्मार्टफोन के डेटिंग एप्स पर मौजूद है. हालांकि ये एप्स कितने भरोसेमंद हैं, यह कहना मुश्किल है. तरह तरह के एप्स फ्लर्ट करने से लेकर चैटिंग और डेटिंग तक के एप्स एंड्रॉयड और आई फोन के लिए डाउनलोड किए जा सकते हैं. यह आप पर निर्भर करता है कि आप उसमें किस तरह लॉगइन कर रहे हैं. कई एप तो फेसबुक से जुड़े होते हैं, जो विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद करते हैं. हां या ना डेटिंग एप टिंडर काफी लोकिप्रय है. असल में इस एप के जरिए आप अपने पार्टनर को या तो सिलेक्ट कर सकते हैं या रिजेक्ट. बस स्क्र ीन स्वाइप कीजिए और आपके सपनों का राजकुमार या राजकुमारी आपके पास होगी. 2012 में लॉन्च होने के 6 महीने बाद ही टिंडर के पांच लाख यूजर हो गए. टिंडर एप युवाओं में ज्यादा लोकिप्रय है. इसके औसत यूजर 23 साल की उम्र वाले हैं. ओके क्य...

30 लाख दो, मेरा पति ले लो

शादी की मांग कर रही पति की प्रेमिका के सामने पत्नी का ऑफर शादीशुदा होने के बावजूद शादी का प्रलोभन देकर शारीरिक संबंध बनाया विकास गुप्ता, कोलकाता कोलकाता में पिछले दिनों एक अजीबोगरीब घटना सामने आयी, जहां एक पत्नी ने 30 लाख रुपये देने पर पति को हमेशा के लिए छोड़ देने का ऑफर दे दिया. यह ऑफर उसने पति की प्रेमिका को दिया, जो उसके पति से शादी की मांग करते हुए उसके घर पहुंची थी. प्रेमिका का कहना था कि महिला के पति ने उसके साथ दुष्कर्म किया है, इसीलिए उसे उससे शादी करनी होगी. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शादी की मांग कर रही पति की प्रेमिका को उसकी पत्नी ने कहा : ठीक है तुम मेरे पति के साथ जो करना है कर सकती हो. लेकिन उसके पहले तुम्हें मेरी शर्त माननी होगी. हमारे तीन बच्चे हैं, जिनके पालन पोषण के लिए 30 लाख रुपये दे दो और मेरे पति को ले लो. पत्नी के इस ऑफर से प्रेमिका तिलमिला गयी और हंगामा करने लगी. दोनों महिलाएं आपस में जोर-जोर से झगड़ने लगी. ऐसे में रात के समय शोर-शराबा सुन कर पूरा मोहल्ला घर पर जुट गया. इतने में इलाके में हंगामा की खबर पा कर थाने से पुलिस मौके पर पहुंच गये. पुलिस को देख कर ...

सुकून का पक्का ठिकाना

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राहुल मिश्र, कोलकाता यह नजारा सियालदह-बजबज रूट के ब्रेस ब्रिज रेलवे स्टेशन का है. इसमें प्लेटफॉर्म पर एक नेत्रहीन गायक ढोल बजा कर अपने मधुर कंठ से लोक गीत सुना रहा है. सा थ में उसकी पत्नी भी बैठी है. उसे घेर कर बैठे बच्चे या पास खड़े बड़ों को शायद ही गंवई बांग्ला में उस गीत के बोल समझ में आ रहे हों. लेकिन गायक का भाव उन्हें समझ आ रहा था. गीत में जीवन व संसार के कष्टों का जिक्र करते हुए गायक ईश्वर से कुछ पूछ रहा था. इत्मिनान से गीत सुन रहे ये लोग यात्री नहीं थे, बल्कि पास की बस्ती के वाशिंदे थे. शायद यही वजह थी कि कई गीतों के बाद भी नेत्रहीन गायक के गमछे में मुश्किल से दो-तीन सिक्के ही गिरे थे. जी हां, वहां का प्लेटफॉर्म दूसरे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म से अलग दिखता है. वहां यात्री कम नजर आते हैं, जबकि पास की बस्ती के लोग अधिक दिखते हैं. वहां बुजुर्ग आराम फरमाते, बच्चे खेलते-मंडराते, मर्द तास खेलने में और महिलाएं बातों में मशगूल दिखती हैं. उनकी बस्ती प्लेटफॉर्म से ही नजर आती है. वहां बिजली-पानी का बंदोबस्त नहीं है. एक दूसरे से लगभग चिपकी सैकड़ों झोपड़ियां हैं, जहां से शायद हवा को भी गुजरने ...

मैंने दिल से कहा ढूँढ लाना ख़ुशी

( मैंने दिल से कहा ढूँढ लाना ख़ुशी नासमझ, लाया ग़म तो ये ग़म ही सही ) \-२ मैंने दिल से कहा ढूँढ लाना ख़ुशी बेचारा कहाँ जानता है ख़लिश है ये क्या ख़ला है शहर भर की ख़ुशी से ये दर्द मेरा भला है जश्न ये रास न आये मज़ा तो बस ग़म में आया है मैंने दिल से कहा ढूँढ लाना ख़ुशी नासमझ, लाया ग़म तो ये ग़म ही सही कभी है इश्क़ का उजाला कभी है मौत का अंधेरा बताओ कौन भेस होगा मैं जोगी बनूँ या लुटेरा कई चेहरे हैं इस दिल के न जाने कौन सा मेरा मैंने दिल से कहा ढूँढ लाना ख़ुशी नासमझ, लाया ग़म तो ये ग़म ही सही हज़ारों ऐसे फ़ासले थे जो तय करने चले थे राहें मगर चल पड़ी थीं और पीछे हम रह गये थे क़दम दो\-चार चल पाये किये फेरे तेरे मन के ( मैंने दिल से कहा ढूँढ लाना ख़ुशी नासमझ, लाया ग़म तो ये ग़म ही सही )

सरोवर में भी कमल ही खिले हैं

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राहुल मिश्र, कोलकाता मौसम के साथ मिजाज का बदलना स्वाभाविक है. चुनावी मौसम में चुनाव की बात न हो, त्योहार के मौसम में त्योहार की और खेल के मौसम में खेल की न हो तो ऐसा अप्राकृतिक ही कहलायेगा. ये तो मौसम का ही जादू है कि इन दिनों रवींद्र सरोवर में भी कमल के फूल ही पूरे रौब से खिले हुए हैं. देश का राजनीतिक मौसम भी कमल फूल के खिलने का ही है. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव में कल्पना के परे प्रदर्शन किया. वर्षो बाद किसी एक पार्टी को बहुमत मिला. ऐसे में जहां चार लोग जुटे, वहां यह चर्चा का विषय न रहे तो यह भी बड़ी चर्चा का विषय बन सकता है. दरअसल, सरोवर में कमल फूल के खिलने को राजनीतिक माहौल से जोड़ने का तुक बने न बने, लेकिन रवींद्र सरोवर के पास के पार्को में प्राकृतिक सुख लेने आनेवालों को देश के वर्तमान माहौल पर चर्चा करते पाया जाना आम बात है. यहां चर्चा करनेवालों में कई मोदी तो कुछ दीदी के समर्थक भी होते हैं. नयी सरकार बन रही है, तो सरकार या प्रधानमंत्री क्या करेंगे. किस मुद्दे को कैसे निबटायेंगे. यह मुख्य विषय रहता ही है. पिछले दिनों मार्निग वाकर्स का एक समूह ...

एक आइकोनिक फोटो के पीछे की मार्मिक कहानी ~~~!!

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आसिफ़ अली हाशमी   इथोपिया में एक कुपोषित बच्ची के मरने के इंतज़ार में उसके पास बैठा एक गिद्ध.....!! इस फोटो को सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर न जाने कितनी बार लाखों ..करोड़ों लोगों द्वारा  शेयर किया गया है, करोड़ों लोगों ने इसको टेग किया है...मगर क्या इसके पीछे की मार्मिक कहानी किसी को पता है....? इस फोटो को खींचने वाले फोटोग्राफर ने तीन माह बाद पश्चाताप  में आत्म हत्या कर ली थी...! यह फोटो मार्च 1993 में मशहूर फोटोग्राफर केविन कार्टर ने भुखमरी और कुपोषण से झूझते देश इथोपिया के एक गांव आयोद में खींचा था... यह एक इथोपियाई कुपोषित बच्ची का फोटो है...जो कि अपने माता पिता की झोंपड़ी की और रेंग कर जाने का प्रयत्न कर रही है....माता पिता..खाना ढूँढने जंगल गए हुए हैं....भूख ने उस बच्ची को बेदम कर रखा है...उसकी ताक में एक गिद्ध बैठा है...जो कि उसके मरने का इंतज़ार कर रहा है...केविन कार्टर ने काफी देर इस दृश्य को देखा ...और अपने कैमरे में क़ैद कर लिया.. ..और उस गिद्ध को वहां से उड़ा दिया ! वैसे इस फोटो के अलावा इथोपिया के इस संकट के उन्होंने और भी कई फोटो खींचे थे...मगर यह फोटो उनको विशेष लग...

मरने से पहले बच्‍चे ने कहा भगवान को सब कुछ बताऊंगा

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दमिश्‍क। 'मैं मरने के बाद भगवान को सब कुछ बताऊंगा,' यह शब्‍द उस साल के बच्‍चे के हैं जिसकी सीरिया में हुए ब्‍लास्‍ट में मौत हो चुकी है। ब्‍लास्‍ट में बुरी तरह से घायल इस बच्‍चे को जब एक अस्‍पताल में इलाज के लिए लाया गया तो यह उसके आखिरी शब्‍द थे। इन शब्‍दों के बाद ही इस बच्‍चे ने दम तोड़ दिया। इस बच्‍चे की फोटोग्राफ और उसके  शब्‍द सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। सवाल उठाए जा रहे हैं कि खुद को इंसान समझने वाले लोगों में क्‍या इंसानियत खत्‍म हो चुकी है। सीरिया में मार्च 2011 से सिविल वॉर जारी है। इस सिविल वॉर में अब तक आधिकारिक‍ तौर पर 150,000 लोगों की मौत हो चुकी है और इसमें से 11,420 बच्‍चे हैं। इस बच्‍चे की फोटो से ही सीरिया में जारी हालातों की एक झलक मिल जाती है। आगे की कुछ स्‍लाइड्स में देखिए इसी बच्‍चे की कुछ तस्‍वीरें जो यकीनन आपकी आंखों में आंसू ला देंगी। रोज बढ़ रहा है आंकड़ा सीरिया में एक अप्रैल तक 150,000 लोगों की मौत रजिस्‍टर हो चुकी हैं। इन 150,000 लोगों की मौतों में फरवरी से लेकर एक अप्रैल के बीच 10,000 लोगों की मौत दर्ज हुई। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक सीरिया में...